भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का आरोप है कि 34 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का आरोप है कि 34 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया
पीड़ितों का आरोप है कि 34 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिल पाया है. इसके साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत और पुनर्वास के लिए लड़ाई जारी है.
भोपाल गैस त्रासदी को 34 साल हो गए है. इतने साल के बाद भी सरकार पीड़ितों के दर्द पर मरहम नहीं लगाई है. पीड़ित मुआवजे समेत बुनियादी सुविधाओं के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.
 
गैस पीड़ितों के हितों के लिए पिछले तीन दशकों से अधिक समय से काम करने वाले भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के संयोजक अब्दुल जब्बार ने कहा कि हादसे के 34 साल बाद भी न तो मध्यप्रदेश सरकार ने और न ही केन्द्र सरकार ने इसके नतीजों और प्रभावों का कोई आकलन करने की कोशिश की है.
 
14-15 फरवरी 1989 को केन्द्र सरकार और अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कारपोरेशन (यूसीसी) के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से धोखा था और उसके तहत मिली रकम का हरेक गैस प्रभावित को पांचवें हिस्से से भी कम मिल पाया है. नतीजतन, गैस प्रभावितों को स्वास्थ्य सुविधाओं, राहत और पुनर्वास, मुआवज़ा, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति और न्याय इन सभी के लिए लगातार लड़ाई लड़नी पड़ी है.
 
जब्बार ने कहा कि हमने उसी वक्त इस समझौते पर यह कह कर सवाल उठाया था कि इस समझौते के तहत मृतकों और घायलों की संख्या बहुत कम दिखाई गई है, जबकि वास्तविकता में यह बहुत अधिक है. इस पर 3 अक्टूबर 1991 को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि यदि यह संख्या बढ़ती है तो भारत सरकार मुआवजा देगी.
 
उन्होंने बताया कि इस समझौते में गैस रिसने से 3,000 लोगों की मौत और 1.02 लाख प्रभावित बताए गए थे. जबकि असलियत में 2-3 दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को यूनियन कार्बाइड के भोपाल स्थित कारखाने से रिसी जहरीली गैस मिक (मिथाइल आइसोसाइनाइट) से अब तक 20,000 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और लगभग 5.74 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
 
इसी बीच, गैस पीड़ितों के हितों के लिये लंबे समय से काम करने वाले भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संध की रशीदा बी, भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरूष संघर्ष मोर्चा के नवाब खां, भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन के रचना ढींगरा एवं चिल्ड्रन अगेन्स्ट डाव कार्बाइड के नौशीन खान ने यहां एक संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया कि केन्द्र एवं राज्य सरकार गैस-पीड़ितों की उपेक्षा कर रही है.
 
अपने संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि हाल के वैज्ञानिक अध्ययन यह बताते हैं कि यूनियन कार्बाइड के गैसों की वजह से भोपाल में मौतों और बीमारियों का सिलसिला जारी है, पर आज तक भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज की निगरानी के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति की 80 प्रतिशत से अधिक अनुशंसाओं को अमल में नहीं लाया गया है.