गणेश उत्सव के दौरान यह मंत्र जपने से होगा कल्याण

गणेश उत्सव के दौरान यह मंत्र जपने से होगा कल्याण

 
विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेशजी की आराधना बहुत मंगलकारी मानी जाती है. गणेशोत्सव में उनके भक्त विभिन्न प्रकार से उनकी आराधना कर रहे हैं. श्लोक, स्तोत्र, मंत्र तथा जाप द्वारा गणेशजी को मनाया जा रहा है.
 
रोज 10 दिन घर से यह मंत्र बोलकर निकलें :
 
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकारकत्रै सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्वराज्य वश्य्करणाय सर्वजन सर्वस्वी-पुरुषाकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा.
 
यह मंत्र दिन की शुभता व सफलता के अतिरिक्त जीवन की प्रगति, उन्नति,धन, धान्य, संपत्ति, सुख, यश, कीर्ति, ….

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जन्माष्टमी का पर्व और क्या है शुभ मुहूर्त : 2018 कृष्ण जन्माष्टमी

जन्माष्टमी का पर्व और क्या है शुभ मुहूर्त : 2018 कृष्ण जन्माष्टमी

इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में काफी असमंजस बना हुआ है. आइए जानते हैं किस दिन मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व और क्या है शुभ मुहूर्त.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2018) हर साल पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है. इस बार जन्माष्टमी का संयोग दो दिन का है. इसल‍िए इस बार जन्माष्टमी का त्योहार दो तिथियों में यानी 2 सितंबर और 3 सितंबर दोनों ही दिन मनाया जा रहा है. 
 
2 सितंबर रविवार को भादो की अष्टमी रात 8 बजकर 46 मिनट में शुरू होगी. लेकिन उदयकालीन अष्टमी सोमवार 3 सितंबर 2018 को है. इसलिए जन्माष्टमी सोमवार क ….

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अमरनाथ यात्रा संपन्न, इस साल 2.85 लाख भक्तों ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

अमरनाथ यात्रा संपन्न, इस साल 2.85 लाख भक्तों ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

28 जून को शुरू हुई तीर्थयात्रा 26 अगस्त को समाप्त हो गई है.  इस साल अब तक 2.84 लाख तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए हैं.
बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा रविवार को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन के दिन छड़ी मुबारक की पूजा के साथ संपन्न हो गई है. दक्षिण कश्मीर के हिमालय में स्थित अमरनाथ की पवित्र गुफा में छड़ी मुबारक के पहुंचने के साथ 60 दिनों तक चलने वाली यात्रा खत्म हो गई.
 
यात्रा के आधार शिविर यात्री निवास भगवती नगर में शनिवार को कोई भी श्रद्धालु नहीं आया और न ही कोई जत्था रवाना किया गया. अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार ….

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आषाढ़ माह में रखें इन बातों का ध्यान

आषाढ़ माह में रखें इन बातों का ध्यान

हिन्दू पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ का महीना है. यह संधि काल का महीना है, इसी महीने से वर्षा ऋतु की शुरुआत होती है. इस महीने में रोगों का संक्रमण सर्वाधिक होता है. इस महीने से वातावरण में थोड़ी सी नमी आनी शुरू हो जाती है. इस महीने को कामना पूर्ति का महीना भी कहा जाता है. इस बार आषाढ़ मास 29 जून से 27 जुलाई तक रहेगा.
 
आषाढ़ माह में कौन-कौन से व्रत और पर्व आते हैं?
 
- आषाढ़ मास के पहले दिन खड़ाऊं, छाता, नमक तथा आंवले का दान किसी ब्राह्मण को किया जाता है
 
- इसी महीने में श ….

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रामनवमी

रामनवमी

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मदिन के सुअवसर पर चैत्र शुक्ल मास के नवमी तिथि को रामनवमी का विशेष पर्व मनाया जाता है।
 
रामनवमी 
साल 2018 में राम नवमी का त्यौहार 25 मार्च को मनाया जाएगा। शारदीय नवरात्र में माता की पूजा 18 अक्टूबर, 2018 को होगी।
 
राम नवमी कथा 
पौराणिक कथानुसार राम नवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म रावण के अंत के लिए हुआ था। श्रीराम को ल ….

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नवरात्रि: आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

नवरात्रि: आज ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

नवरात्रि की नवमी तिथि को मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है, जो दरअसल देवी का पूर्ण स्वरुप है. केवल इस दिन मां की उपासना करने से, सम्पूर्ण नवरात्रि की उपासना का फल मिलता है. आज के दिन महासरस्वती की उपासना भी होती है, जिससे अद्भुत विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है.
 
महानवमी पर कुछ विशेष प्रयोग करने से विशेष तरह की मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं. इस दिन हवन करने से नवरात्रि का फल सम्पूर्ण होता है, साथ ही अद्भुत शक्ति की प्राप्ति होती है.
 
मां सिद्धिदात्री की उपासना से कैसे वरदान मिलते हैं? Read More

नवम नवदुर्गा: माता सिद्धिदात्री

नवम नवदुर्गा: माता सिद्धिदात्री

माता दुर्गाज़ी की नवी शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है | ये सभी प्रकार की सिद्धियो को देने वाली है | ममता मोह से विरक्त होकर महर्षि मेधा के उपदेश से समाधि ने देवी की आराधना कर, ज्ञान प्राप्त कर मुक्ति प्राप्त की थी | सिद्धि अर्थात मोक्ष को देने वाली होने से उस देवी का नाम  "सिद्धिदात्री" पड़ा |
 
चैत्र नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की 26 मार्च, 2018 को की जाएगी। शारदीय नवरात्र में माता की पूजा 18 अक्टूबर, 2018 को होगी। 
 
माता सिद्धिदात्री का उपासना मंत्र
सिद्ध ….

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अष्टम नवदुर्गा: माता महागौरी

अष्टम नवदुर्गा: माता महागौरी

माता दुर्गाज़ी की आठवी शक्ति का नाम "मातामहागौरी" है | हिमालय मे तपस्या करते समय गौरी का शरीर धूल- मिट्टी से ढककर मलिन हो गया था जिसे शिवजी ने गंगाजल से मलकर धोया, तब गौर वर्ण प्राप्त हुआ था, इसीलये वेविश्व मे "महागौरी" नाम से प्रसिद्ध हुई |
 
माता महागौरीका उपासना मंत्र
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा॥
 
नवरात्र का आठवां दिन 
नवरात्र के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जा ….

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चैत्र नवरात्रि की एक ही दिन है सप्तमी और अष्टमी

चैत्र नवरात्रि की एक ही दिन है सप्तमी और अष्टमी

शनिवार को चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी है. सप्तमी और अष्टमी आज एक ही दिन है साथ ही द्विपुष्कर योग भी है. सैकड़ों साल बाद ग्रह -नक्षत्रों का अद्भुत संयोग बन गया है. शनिवार और बुध का सुबह मृगशिरा नक्षत्र है. राजा रामचन्द्र जी ने लंका चढ़ाई से पहले इसी दिन माता की पूजा की थी. मां दुर्गा ने उन्हें विजयी होने वरदान दिया था.
 
महाष्टमी को माता महागौरी की पूजा होती है इससे सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलेगी. माता शनि के कष्टों से मुक्ति दिलाएंगी. जिस काम में हाथ डालोगे या नई शुरुआत करोगे मां के आशिर्वाद से वह काम अवश्य पूरा होगा. बहुत अच्छा मुहूर्त है आइए जानते ….

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नवरात्रि के दिनों में दुर्गा शप्तसती के पाठ से मिलेंगे फल

नवरात्रि के दिनों में दुर्गा शप्तसती के पाठ से मिलेंगे फल

मां कात्यायनी, मां दुर्गा का ही संघारक स्वरुप है. महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदि शक्ति ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा. मां कात्यायनी के रूप में ही दुर्गा मां ने महिषासुर का संहार किया था. मां कात्यायनी की आराधना करने वाले भक्तो के काम सरलता एवं सुगमता से होते हैं.
 
छठे नवरात्र के वस्त्रों का रंग एवं प्रसाद नवरात्र में आप मां कात्यायनी की पूजा में लाल रंग के वस्त्रों का प्रयोग कर सकते हैं. यह दिन केतु ग्रह से सम्बंधित शांति पूजा के लिए सर्वोत्तम है. छठवीं नवरात्रि के दिन मां को शहद का भोग लगाने से आपक ….

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नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा

नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा

मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरुप हैं, जो काफी भयंकर है. इनका रंग काला है और ये तीन नेत्रधारी हैं. मां कालरात्रि के गले में विद्युत की अद्भुत माला है. इनके हाथों में खड्ग और कांटा है और इनका वाहन है -गधा. परन्तु ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं, अतः इन्हें शुभंकरी भी कहते हैं.
 
इनकी उपासना से क्या लाभ हैं?
 
- शत्रु और विरोधियों को नियंत्रित करनेके लिए इनकी उपासना अत्यंत शुभ होती है.
 
- इनकी उपासना से भय, दुर्घटना तथा रोगों का नाश होता है.
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फल चाहिए तो पूरे नवरात्र करें इन 3 देवियों की पूजा

फल चाहिए तो पूरे नवरात्र करें इन 3 देवियों की पूजा

मां दुर्गा का मातृत्व स्वरुप मां स्कंदमाता को समर्पित है. पुराणों के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में कार्तिकेय यानी स्कन्द कुमार देवताओं के सेनापति बने थे और देवताओं को विजय दिलाई थी. इन्हें कुमार, शक्तिधर और मयूर पर सवार होने के कारण मयूरवाहन भी कहा जाता है. मां दुर्गा का यह नाम श्रीस्कन्द (कार्तिकेय) की माता होने के कारण पड़ा. स्कन्द कुमार बाल्यावस्था में मां स्कंदमाता की गोद में बैठें हैं. मां स्कंदमाता की सवारी सिंह हैं एवं भुजाओं में कमल पुष्प हैं. मां स्कन्द माता की आराधना करने वाले भक्तों को सुख शान्ति एवं शुभता की प्राप्ति होती है.
 
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नवरात्र के पांचवें दिन करें स्कंदमाता की पूजा, इन मंत्रों से करें प्रसन्न

नवरात्र के पांचवें दिन करें स्कंदमाता की पूजा, इन मंत्रों से करें प्रसन्न

नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाती है. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम किया गया है. भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं.
 
स्कंदमाता का स्वरूप
स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं जिनमें से माता ने अपने दो हाथों में कमल का फूल पकड़ा हुआ है. उनकी एक भुजा ऊपर की ओर उठी हुई है जिससे वह भक्तों को आशीर्वाद देती हैं और एक हाथ से उन्होंने गोद में बैठे अपने पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है. ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं. इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कह ….

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नवरात्रि का चौथा दिन, मां कुष्मांडा को ऐसे करें प्रसन्न

नवरात्रि का चौथा दिन, मां कुष्मांडा को ऐसे करें प्रसन्न

कुष्मांडा देवी का पूजन नवरात्र के चौथे दिन होता है. अपनी हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड(अंड) को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा हुआ. ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं.
 
मां की आठ भुजाएं हैं.अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं. संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं, और इन्हें कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है, ज्योतिष में इनका सम्बन्ध बुध ग्रह से है.  
 
क्या है देवी कुष्मांडा की पूजा विधि और क्या है इनकी पूजा से लाभ?
 
- हरे वस्त ….

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नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा

नवरात्र के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा

माँ चंद्रघंटा माँ पार्वती का सुहागिन स्वरुप है. इस स्वरुप में माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा सुशोभित है इसीलिए इनका नाम चन्द्र घंटा पड़ा. माँ चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है एवं उनको असीम शांति और वैभवता की प्राप्ति होती है. माँ चंद्रघंटा के ध्यान मंत्र, स्तोत्र एवं कवच पाठ से साधक का मणिपुर चक्र जागृत होता है जिससे साधक को सांसारिक कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है.
 
चंद्रघंटा को शांतिदायक और कल्याणकारी माना जाता है. माता चंद्रघंटा का शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है, इनके दस हाथ हैं. दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र स ….

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तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, ऐसे करें प्रसन्न

तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, ऐसे करें प्रसन्न

मां दुर्गा की महाउपासना की नवरात्रि में हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों की साधना की जाती है और मां के हर रूप की अलग महिमा भी है. नवरात्रि के तीसरे दिन देवी के तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. माता के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है. इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.
 
देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है. इनकी दस भुजाएं और तीन आंखें हैं. आठ हाथों में खड्ग, बाण आदि दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं और दो हाथों से ये भक्तों को आशीष देती हैं. इनका संपूर्ण शरीर दिव्य आभामय है. इनके दर्शन से भक्तों का हर तरह से कल्याण होता है. माता भक्तों को सभी तरह क ….

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द्वितीय नवदुर्गा: माता ब्रह्मचारिणी

द्वितीय नवदुर्गा: माता ब्रह्मचारिणी

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन "माता ब्रह्मचारिणी" की पूजा-अर्चना की जाती है | भगवान शिव से विवाह हेतु प्रतिज्ञाबद्ध होने के कारण ये ब्रह्मचारिणी कहलायी | ब्रह्म का अर्थ है तपस्या ओर चारिणी यानीआचरण करने वाली| इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली |
 
नवरात्र: ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा नवरात्र के दूसरे दिन की जाती है। चैत्र नवरात्र 2018 में माता की पूजा 19 मार्च को की जाएगी। 
शारदीय नवरात्र 2018 में माता की पूजा 10 अक्टूबर को होगी। 
 
माता का स ….

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प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री

प्रथम नवदुर्गा: माता शैलपुत्री

देवी दुर्गा के नौ रूप होते है | देवी दुर्गा ज़ी के पहले स्वरूप को "माता शैलपुत्री" के नाम से जाना जाता है |  ये ही नवदुर्गाओ मे प्रथम दुर्गा है | शैलराज हिमालय के घर पुत्री रूप मे उत्पन्न होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा | नवरात्र पूजन मे प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा ओर उपासना की जाती है |
 
प्रथम पूजा का दिन:  चैत्र नवरात्र में मां शैलपुत्री जी की पूजा 18 मार्च 2018 को की जाएगी। 
आश्विन शारदीय नवरात्र में माता की पूजा 10 अक्टूबर को की जाएगी। 
 
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क्या है नवरात्रि के पहले दिन का महत्व और कैसे करें पूजा?

क्या है नवरात्रि के पहले दिन का महत्व और कैसे करें पूजा?

नवरात्रि वर्ष में चार बार पड़ती है- माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन. नवरात्रि से वातावरण में तमस का अंत होता है और सात्विकता की शुरुआत होती है. मन में उल्लास, उमंग और उत्साह की वृद्धि होती है.
 
दुनिया में सारी शक्ति, नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है, इसलिए इसमें देवी की उपासना ही की जाती है. नवरात्रि के प्रथम दिन देवी के शैलपुत्री स्वरुप की उपासना की जाती है. इनकी उपासना से देवी की कृपा तो मिलती ही है साथ में सूर्य भी काफी मजबूत होता होता है. सूर्य सम्बन्धी जैसी भी समस्या हो आज के दिन दूर की जा सकती है
 
अगर स ….

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नवरात्रि का पहला दिन, जानें कलश स्थापना की सही जगह और शुभ मुहूर्त

नवरात्रि का पहला दिन, जानें कलश स्थापना की सही जगह और शुभ मुहूर्त

आज 18 मार्च से चैत्र नवरात्रि आरंभ होने जा रही है. नवरात्रि के यह 9 दिन मां दुर्गा की पूजा व उपासना के दिन होते हैं. कई श्रद्धालु इन दिनों में अपने घर पर मंगल घटस्थापना करते हैं. अखंड ज्योति जलाते हैं. नौ दिनों का उपवास रखते हैं. आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि 2018 के मंगल कलश स्थापना का शुभमुहूर्त एव दीपज्योति प्रज्वलन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त...
 
आज प्रात: 9:30 से 12:30 तक शुभ मुहूर्त है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:51 तक है और सायंकाल का शुभ मुहूर्त 6:30 से 9:30 बजे तक है.
 
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बहुत फलदायी है इस बार की नवरात्रि, ऐसे करें पूजा और कलश स्थापना

बहुत फलदायी है इस बार की नवरात्रि, ऐसे करें पूजा और कलश स्थापना

यह नवरात्रि चैत्र शुक्ल पक्ष की वासंतिक नवरात्रि है. इसे शक्ति पैदा करने की नवरात्रि भी कहा जाता है. इस बार यह नवरात्रि 18 मार्च से शुरू होगी और इसका समापन रामनवमी के साथ 25 मार्च को होगा. इस बार की नवरात्रि आठ दिन की होगी.
 
कलश की स्थापना कैसे करें?
 
- कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए.
 
- एक लकड़ी का पटरा रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाना चाहिए.
 
- इस कपड़े पर थोड़े-थोड़े चावल रखने चाहिए.

शुरू होने वाले हैं नवरात्र, ऐसे करें पूजा की तैयारियां

शुरू होने वाले हैं नवरात्र, ऐसे करें पूजा की तैयारियां

नवरात्रि पर देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है. मां दुर्गा के नौ रूपों की अराधना का पावन पर्व शुरू होने वाला है. शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है. देवी के इन स्वरूपों की पूजा नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है. इस बार नवरात्र 18 मार्च से शुरू हो रहे हैं. नवरात्रि के नौ दिन लगातार माता पूजन चलता है. तो आइए जानें देवी के इस पावन पर्व पर कैसे करें पूजन की तैयारियां...
 
देवी पूजन की विशेष सामग्री :
 
- माता की मूर्ति या तस्वीर की स्थापना के लिए चौकी.
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फलदायी है चैत्र मास, ऐसे करें पूजा-उपासना

फलदायी है चैत्र मास, ऐसे करें पूजा-उपासना

चैत्र भारतीय पंचांग का पहला महीना है. चित्रा नक्षत्र से सम्बन्ध होने के कारण इसका नाम चैत्र है. इस महीने में वसंत का अंत और ग्रीष्म का आरम्भ होता है. इस महीने से ज्योतिष का बहुत गहरा सम्बन्ध है क्योंकि इस महीने से शुभता और ऊर्जा का आरम्भ होता है. इस बार चैत्र का महीना 02 मार्च से 31 मार्च तक रहेगा.
 
चैत्र के महीने के पर्व और त्यौहार क्या हैं?
 
- कृष्ण पक्ष की पंचमी को रंग पंचमी मनाई जाती है.
 
- इसी महीने में पापमोचनी एकादशी भी आती है.
 
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खुशियों का त्यौहार होली

खुशियों का त्यौहार होली

बसंत ऋतु के आते ही राग, संगीत और रंग का त्यौहार होली, खुशियों और भाईचारे के सन्देश के साथ अपने रंग-बिरंगी आंचल में सबको ढंक लेती है। हिन्दुओं का यह प्रमुख त्यौहार होली हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस पवित्र त्यौहार के सन्दर्भ में यूं तो कई कथाएं इतिहासों और पुराणों में वर्णित है, परन्तु हिन्दू धर्म ग्रन्थ विष्णु पुराण में वर्णित प्रहलाद और होलिका की कथा सबसे ज्यादा मान्य और प्रचलित है।
 
प्रहलाद और होलिका की कथा 
नारद पुराण की एक कथानुसार श्रीहरि विष्णु के परम भक्त प्रहलाद ….

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होली पर धन लाभ और किस्मत संवारने के लिए करें ये उपाय

होली पर धन लाभ और किस्मत संवारने के लिए करें ये उपाय

विशेष ति‍थियों और अवसरों पर शुभ-अशुभ शक्तियां ब्रह्मांड में सक्रिय हो जाती है. उन्हीं को अनुकूल बनाने के लिए उपाय किए जाते हैं. होली का पर्व भी उनमें से एक है. होली के पहले दिन, होली वाले दिन और अगले दिन तक कुछ विशेष लेकिन सरल उपाय किए जाते हैं. यह उपाय किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि खुद के सुख, शांति, सफलता और सुरक्षा के लिए किए जाते हैं. पेश है कुछ ऐसे ही सरल और रोचक उपाय जिन्हें आप आसानी से खुद ही कर सकते हैं-
 
उपाय 1: अगर आपको लगता है कि किसी ने आपके विरुद्ध कोई टोटका कर रखा है तो होली की रात में जहां होलिका दहन हो, ….

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जानें, क्या है होलिका दहन का पौराणिक महत्व?

जानें, क्या है होलिका दहन का पौराणिक महत्व?

होलिका दहन की लपटें बहुत शुभकारी होती हैं. होलिका दहन की अग्नि में हर चिंता खाक हो जाती है, दुखों का नाश हो जाता है और इच्छाओं को पूर्ण होने का वरदान मिलता है. बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व में जितना महत्व रंगों का है उतना ही होलिका दहन का भी है. ये मान्यता है कि विधि विधान से होलिका पूजा और दहन करने से मुश्किलों को खत्म होते देर नहीं लगती.
 
होलिका दहन पर शुभ संयोग
ज्योतिषियों का कहना है कि होली पर अगर आप विधि विधान से परिक्रमा कर सही प्रसाद चढ़ा दें तो खाली झोली भरते देर नहीं लगेगी क्‍योंकि इस बार होलिका दहन ….

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होलिका दहन की भस्म के होते हैं ये शुभ प्रभाव!

होलिका दहन की भस्म के होते हैं ये शुभ प्रभाव!

हिन्दू धर्मानुसार, होली के दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है और इस दिन पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. होली का रंगो का त्योहार जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही जरूरी है होलिका दहन. संपूर्ण भारतवर्ष में यह त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन ब्रज और मथुरा जैसे क्षेत्रों में इसका रंग ही अलग होता है.
 
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
साल 2018 में होलिका दहन 1 मार्च को है. इस बार होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 26 मिनट से लेकर 8 बजकर 55 मिनट तक रहेगा.
 
पूजा ….

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पढ़ाई में ध्‍यान लगने का आसान मंत्र

पढ़ाई में ध्‍यान लगने का आसान मंत्र

ऐसा देखा गया है कि कुछ छात्रों के मन में पढ़ने की इच्‍छा तो बड़ी प्रबल होती है, पर पढ़ाई में उनका ध्‍यान नहीं लगता है. किताब के खुले पन्‍ने छात्र को निहार रहे होते हैं और विद्यार्थी का ध्‍यान अक्‍सर भटककर कहीं दूसरी जगह चला जाता है. दूसरी तरह की समस्‍या यह देखी जाती है कि कुछ लोग पढ़ाई तो गंभीरता के साथ करते हैं, पर वे पढ़ी हुई बातों को याद नहीं रख पाते. इस तरह की समस्‍याओं का निदान श्रीरामचरितमानस के मंत्र से संभव है.
अगर किताबों के अध्‍ययन के साथ-साथ नियमित रूप से मंत्र का बोलकर जाप किया जाए या मन ही मन स्‍मरण किया जाए, तो इससे एकाग ….

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सूर्य ग्रहण का ऐसे उठा सकते हैं लाभ

सूर्य ग्रहण का ऐसे उठा सकते हैं लाभ

Surya Grahan 2018 date and time (सूर्य ग्रहण 2018 तारीख और समय): चंद्रग्रहण (Chandra Grahan) के बाद अब सूर्यग्रहण लगने वाला है. भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण रात्रि 00.25 से 04.17 तक लगेगा. इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 03 घंटे 52 मिनट होगी. यह ग्रहण कुम्भ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में होगा. यह आंशिक सूर्य ग्रहण दक्षिणी अमेरिका और अंटार्टिका में दिखाई देगा लेकिन भारत में इसका दर्शन नहीं हो सकेगा इसलिए सूतक सम्बन्धी नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है. साल 2018 में कुल तीन सूर्य ग्रहण घटित होंगे. ये तीनों आंशिक सूर्य ग्रहण होंगे. ये तीनों सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार् ….

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जानें, कब है जया एकादशी और क्या है इसका महत्व?

जानें, कब है जया एकादशी और क्या है इसका महत्व?

व्रतों में प्रमुख व्रत नवरात्रि , पूर्णिमा , अमावस्या तथा एकादशी के हैं. उसमे भी सबसे बड़ा व्रत एकादशी का माना जाता है. चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति ख़राब और अच्छी होती है. ऐसी दशा में एकादशी व्रत से चन्द्रमा के हर ख़राब प्रभाव को रोका जा सकता है. यहाँ तक कि ग्रहों के असर को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है क्योंकि एकादशी व्रत का सीधा प्रभाव मन और शरीर , दोनों पर पड़ता है. परन्तु एकादशी का लाभ तभी हो सकता है जब इसके नियमों का पालन किया जाय.
 
क्या है जया एकादशी का महत्व?
 

ख़ुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति

ख़ुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति

ख़ुशी और समृद्धि का प्रतीक मकर संक्रांति त्यौहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों में यह त्यौहार अलग-अलग नाम और परम्परा के अनुसार मनाया जाता है।
 
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सिखों का प्रमुख त्यौहार लोहड़ी

सिखों का प्रमुख त्यौहार लोहड़ी

लोहड़ी सिखों का प्रमुख त्यौहार है जो मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह मूलत: पंजाब का त्यौहार माना जाता है लेकिन आज यह पूरे भारतवर्ष में समान हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लोहड़ी पारंपरिक रूप से कृषि से संबंधित त्यौहार है, हालांकि कई लोग इसे मौसम से जुड़ा हुआ त्यौहार भी मानते हैं। 
 
लोहड़ी कैसे मनाई जाती है? 
लोहड़ी के कुछ दिन पहले से बच्चे लोहड़ी के लिए लकड़ियां एवम अन्य सामान इकठ्ठा करना शुरु कर देते हैं। लोहड़ी की संध्या को आग जलाई जाती है। इसके बाद सभी लोग अग्नि के चारों तरफ चक्कर काटते हुए नाचते ….

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किसानों का त्यौहार पोंगल

किसानों का त्यौहार पोंगल

किसानों का त्यौहार पोंगल मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाया जाता है। चार दिनों तक मनाया जानेवाला यह त्यौहार कृषि एवं फसल से संबंधित देवता को समर्पित है। पारंपरिक रूप से संपन्नता को समर्पित इस त्यौहार के दिन भगवान सूर्यदेव को जो प्रसाद भोग लगाया जाता है उसे पोगल कहा जाता है, जिस कारण इस त्यौहार का नाम पोंगल पड़ा।
 
पोंगल त्यौहार मुख्यतः चार तरह का होता है:
 
* भोगी पोंगल
 
* सूर्य पोंगल
 
* मट्टू पोंगल
 
* कन्या Read More

जानिए, क्या है हनुमान चालीसा और इसका महत्व?

जानिए, क्या है हनुमान चालीसा और इसका महत्व?

भक्त द्वारा अपने भगवान या इष्ट को प्रसन्न करने करने लिए तथा अपनी समस्याओं के निवारण के लिए सरल भाषा मैं की गयी प्रार्थना चालीसा कही जाती है. इसको चालीसा इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें चालीस लाइन होती हैं. सरल भाषा में लिखा होने के कारण इसको आसानी से पढ़ा जा सकता है इसलिए यह जनता में काफी लोकप्रिय हुआ. इसके पाठ के लिए किसी ख़ास नियम की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
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कौन हैं आपके इष्ट देव? किनकी उपासना से होगा आपका कल्याण

कौन हैं आपके इष्ट देव? किनकी उपासना से होगा आपका कल्याण

सभी देवी –देवताओं की पूजा –उपासना करने के बाद भी अक्सर इंसान का मन भटकता ही रहता है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो हर इंसान का मन किसी एक देवी या देवता की ओर सबसे ज्यादा आकर्षित होता है और वही देवी या देवता आपके इष्ट देव हो सकते हैं. अगर आपकी कोई कुल देवी या देवता हैं तो वो भी आपके इष्ट हो सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि कौन हैं आपके इष्ट देव जिनकी उपासना से होगा आपका कल्याण....
 
इष्ट देव कौन हैं?
- धार्मिक मान्यताओं में हर व्यक्ति के एक इष्ट देव या देवी होते हैं
 
- इनकी ….

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घर में भूलकर भी ना लगाएं भगवान शिव की ये तस्वीरें

घर में भूलकर भी ना लगाएं भगवान शिव की ये तस्वीरें

भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है. भगवान शिव सौम्य और रौद्र दोनों रूपों के लिए विख्यात हैं. वास्तुशास्त्र के हिसाब से घर में देवी-देवताओं  मूर्ति जरूर लगानी चाहिए इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती. लेकिन मूर्तियों को लगाने के नियम का पालन करना भी जरूरी होता है, गलत तरीके से लगाई हुई भगवान की मूर्ति जीवन में परेशानी का कारण भी बन सकती है.
 
1. जिस तस्वीर में भगवान शिव मां पार्वती, बेटे गणेश और कार्तिक के साथ हों वह तस्वीर घर में लगाना काफी शुभ होता है. इससे घर में क्लेश नहीं होता है और घर के बच्चे आज्ञाकारी होते हैं.
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हनुमान जी

हनुमान जी

हिन्दू धर्म में हनुमान जी को साहस, शक्ति, वफादारी तथा निस्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है। महाकाव्य रामायण में हनुमान जी को भगवान राम जी का सबसे बड़ा भक्त बताया गया है। इनकी नित दिन आराधना करने से मनोवांछित वरदान प्राप्त होता है। भगवान शिव के रुद्रावतार माने जाने वाले हनुमान जी की मंगलवार के दिन विशेष पूजा की जाती है। 
 
हनुमान जी का मंत्र 
मान्यता है कि 'ॐ श्री हनुमते नम:॥' का जाप करने से भक्तिभाव, सकारात्मक सोच, शक्ति की बढ़ोत्तरी होती है।
 
हनुमान जी के नाम&n ….

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सोमवार व्रत कथा

सोमवार व्रत कथा

हिन्दू धर्म के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। जो व्यक्ति सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करते हैं उन्हें मनोवांछित फल अवश्य मिलता है।
व्रत कथा: किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके घर में धन की कोई कमी नहीं थी लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी जिस वजह से वह बेहद दुखी था। पुत्र प्राप्ति के लिए वह प्रत्येक सोमवार व्रत रखता था और पूरी श्रद्धा के साथ शिवालय में जाकर भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करता था। उसकी भक्ति देखकर मां पार्वती प्रसन्न हो गई और भगवान शिव से उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने का निवेदन किया। पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा कि ….

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प्रथम पूजनीय गणपति गजानन

प्रथम पूजनीय गणपति गजानन

प्रथम पूजनीय गणपति गजानन गणेश हिन्दू धर्म के लोकप्रिय देव हैं। इनका वर्णन समस्त पुराणों में सुखदाता, मंगलकारी और मनोवांछित फल देने वाले देव के रूप में किया गया है। माता पार्वती और शिवजी के पुत्र भगवान श्री गणेश को महाराष्ट्र में सिद्धिविनायक और गणपति आदि नामों से जाना जाता है। 
 
श्री गणेश जी का जन्म 
गणेश जी का वर्णन पुराणों में माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के दूसरे पुत्र के रूप में है। शिवपुराण के अनुसार गणेश जी शिवा यानि पार्वती जी के देह की मैल से उत्पन्न हुए हैं।