ये हैं दुनिया के ऐसे अनोखे पुल, जिन्हें देखकर थम जाती हैं सांसें

ये हैं दुनिया के ऐसे अनोखे पुल, जिन्हें देखकर थम जाती हैं सांसें

गोल्डन ब्रिज, वियतनाम- वियतनाम में एक ऐसा अद्भुत पुल है जो दुनियाभर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इस पुल की बनावट इतनी शानदार है कि देखने वालों की सासें एक पल के लिए रुक सी जाती हैं. जी हां, इस पुल को केवल दो बड़े हाथ थामे हुए हैं. ये पुल समुद्र तल से लगभग 1,400 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है, जिसकी लंबाई करीब 150 मीटर की है.

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चारों दिशाओं में आदिशंकराचार्य ने स्थापित किए थे ये 4 मठ

चारों दिशाओं में आदिशंकराचार्य ने स्थापित किए थे ये 4 मठ

प्राचीन भारतीय सनातन परम्परा के विकास और हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार में आदि शंकराचार्य का महान योगदान है. उन्होंने भारतीय सनातन परम्परा को पूरे देश में फैलाने के लिए भारत के चारों कोनों में चार शंकराचार्य मठों की स्थापना की थी. ये चारों मठ आज भी चार शंकराचार्यों के नेतृत्व में सनातन परम्परा का प्रचार व प्रसार कर रहे हैं.
 
हिंदू धर्म में मठों की परंपरा लाने का श्रेय आदि शंकराचार्य को जाता है. आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में चार मठ की स्थापना की थी. आइए जानते हैं आदिशंकराचार्य द्वारा स्थापित इन मठों के बारे में...
 
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मां कालका जी मंदिर

मां कालका जी मंदिर

भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित कालका जी मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर और देवीपीठ माना जाता है। यह मंदिर एक छोटी-सी पहाड़ी पर स्थित है। माना जाता है कि यह मंदिर करीब 3000 वर्ष पुराना है। कालका जी का मंदिर देवी के प्रसिद्ध सिद्ध पीठों में से एक है, और मां काली को समर्पित है। इसे "मनोकामना सिद्ध पीठ" के नाम से भी जाना जाता है। लोगों के बीच मां काली की उत्पत्ति से संबंधित कई कथाएं प्रचलित हैं। 
 
मां कालका जी से संबंधित एक कथा 
एक कथा के अनुसार शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज राक्षसों के अत्याचार से परेशान होकर सभी ….

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पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने वाली मां घंटीयाली का मंदिर...

पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने वाली मां घंटीयाली का मंदिर...

जैसलमैर से 120 किलोमीटर दूर और माता तनोट मंदिर से 5 किलोमीटर पहले माता घंटीयाली का दरबार है. माता घंटीयाली और माता तनोट की पूजा बीएसएफ के सिपाही ही करते हैं. 1965 की जंग में माता का ऐसा चमत्कार दिखा कि पाकिस्तानी सेना वहीं ढेर हो गई. कहा जाता है कि पाक सेना एक-दूसरे को ही दुश्मन समझकर लड़ पड़ी, माता के मंदिर में घुसे पाक सैनिक आपसी विवाद में ढेर हो गए और तीसरे चमत्कार में पाक सैनिक अंधे हो गए.
 
कितना पुराना है मंदिर
मंदिर के मुख्य पुजारी भी बीएसएफ सिपाही ही हैं. इनका नाम है पंडित सुनील कुमार अवस्थी. अवस्थी की मानें तो ….

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मां पीतांबरा के दरबार से अनसुनी नहीं जाती कोई पुकार

मां पीतांबरा के दरबार से अनसुनी नहीं जाती कोई पुकार

मध्य प्रदेश के झांसी के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा के मंदिर से कोई पुकार कभी अनसुनी नहीं जाती. राजा हो या रंक, मां के नेत्र सभी पर एक समान कृपा बरसाते हैं.
इस सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में परम तेजस्वी स्वामी जी के द्वारा की गई. मां पीतांबरा का जन्म स्थान, नाम और कुल आज तक रहस्य बना हुआ है. मां का ये चमत्कारी धाम स्वामी जी के जप और तप के कारण ही एक सिद्ध पीठ के रूप में देशभर में जाना जाता है.
 
मंदिर के आचार्य हरी ओम पाठक बताते है कि चर्तुभुज रूप में विराजमान मां पीतांबरा के एक हाथ में गदा, दूसरे में पाश, तीसरे में वज्र और चौथे हा ….

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इस मंदिर में देवी को चढ़ाई जाती है हथकड़ी...

इस मंदिर में देवी को चढ़ाई जाती है हथकड़ी...

हमारे देश में एक म‍ंदिर ऐसा भी है जहां लोग देवी को हथकड़ी चढ़ाकर अपनी मन्‍नत पूरी होने की आस रखते हैं. यह मंदिर राजस्‍थान के प्रतापगढ़ जिले में है. इसका नाम है दिवाक मंदिर. माता का यह मंदिर जोलर ग्राम पंचायत नाम की जगह पर है. इस मंदिर में दूर-दूर से लोग आते हैं. माता को खुश करने के लिए लोग हथकड़‍ियां और बेड़‍ियां चढ़ाते हैं. 
 
यहां मंदिर परिसर में करीब 200 साल पुराना एक त्रिशूल है, उसी पर ये सब चढ़ाया जाता है. कहा जाता है कि इस त्रिशूल पर जो ह‍थकड़‍ियां चढ़ी हैं, उनमें से कई तो 100 साल से भी ज्‍यादा पुरानी हैं. य ….

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चामुंडेश्वरी मंदिर

चामुंडेश्वरी मंदिर

 
चामुंडेश्वरी मंदिर कर्नाटक राज्य की चामुंडी नामक पहाड़ियों पर स्थित हिन्दुओं का प्रमुख धार्मिक स्थान है। यह मंदिर चामुंडेश्वरी देवी को समर्पित है। चामुंडेश्वरी देवी को दुर्गा जी का ही रूप माना जाता है। चामुंडी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर दुर्गा जी द्वारा राक्षस महिषासुर के वध का प्रतीक माना जाता है।  चामुंडी पहाड़ी पर महिषासुर की एक ऊंची मूर्ति है और उसके बाद मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में किया गया था।
 
चामुंडेश्वरी शक्तिपीठ 
चामुंडी पर्वत पर स्थिति चामुंडेश्वरी मंदिर को एक ….

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नैना देवी का मंदिर

नैना देवी का मंदिर

नैना देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में स्थित है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के लोगों का पवित्र धार्मिक स्थान है। इन्हें देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहां देवी सती के नैन यानि आंखें गिरी थीं। माता नैना देवी अपने इस भव्य मंदिर में पिंडी रूप में स्थापित हैं। 
 
नैना देवी से जुड़ी एक कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार पिता दक्ष के यज्ञ में पति का अपमान होने पर, माता पार्वती ने स्वयं को उसी यज्ञ में भस्म कर लिया। इसके बाद शिव जी अपना आपा खो बैठे तथा माता पार्वती के देह को लेकर इधर-उधर भटक ….

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ज्वाला देवी मंदिर

ज्वाला देवी मंदिर

ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ज्वालामुखी नामक गांव में ऊंची पहाड़ियों पर स्थिति है। इस मंदिर को ज्वालामुखी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। ज्वाला देवी का मंदिर देवी के 51 शक्ति पीठों में से एक है। यह हिन्दू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थानों में शामिल है। ज्वाला देवी की उत्पत्ति से संबंधित कई कथाएं लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं।
 
ज्वाला देवी मंदिर से जुड़ी एक कथा 
कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता सती के मृत शरीर को लेकर इधर-उधर घूमने रहे थे तब शिव जी की यह स्थिति देखकर सभी देवतागण भगवान विष्णु के पास पहुंचे तथ ….

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शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र है कामाख्या मंदिर

शक्ति साधना का सबसे बड़ा केंद्र है कामाख्या मंदिर

कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी (असम) के पश्चिम में 8 कि.मी. दूर नीलांचल पर्वत पर स्थित है. माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है. माता सती के प्रति भगवान शिव का मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर के 51 भाग किए थे. 
 
जिस-जिस जगह पर माता सती के शरीर के अंग गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए. कहा जाता है कि यहां पर माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा था, उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई. कहा जाता है यहां देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं.
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काशी में है मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर, करती हैं हर मनोकामना पूरी

काशी में है मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर, करती हैं हर मनोकामना पूरी

मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर काशी के सप्तसागर (कर्णघंटा) क्षेत्र में स्थित है. दुर्गा की पूजा के क्रम में ब्रह्मचारिणी देवी का दर्शन-पूजन बहुत महत्‍वपूर्ण माना गया है.
 
सुबह से ही लग जाती है भीड़ 
काशी के गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है. श्रद्धालु लाइन में लगकर मां का दर्शन प्राप्त करते हैं. श्रद्धालु मां के इस रूप का दर्शन करने के लिए नारियल, चुनरी, माला-फूल आदि लेकर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं. 
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वैष्णो देवी मंदिर

वैष्णो देवी मंदिर

जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में स्थित वैष्णो देवी मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। वैष्णो देवी मंदिर हिन्दू धर्म का एक अहम धार्मिक केन्द्र माना जाता है। वेद-पुराणों में रो इस मंदिर की अधिक चर्चा नहीं है लेकिन उपनिषदों में इनके बारे में विस्तार से चर्चा की गई है।   
 
वैष्णो देवी से संबंधित कथा 
कथा के अनुसार कटरा नामक एक स्थान पर एक श्रीधर नाम परम भक्त रहा करता था। उसकी कोई संतान नहीं था, जिस कारण वह बहुत दुखी रहता था। 
 
एक बार नवरात्रि की पूजा सम्पन् ….

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500 साल पहले इस गुरुद्वारे की खुद गुरुनानक जी ने की थी स्थापना, देखिये क्या है खास!

500 साल पहले इस गुरुद्वारे की खुद गुरुनानक जी ने की थी स्थापना, देखिये क्या है खास!

वाहे गुरु जी दा खालसा, वाहे गुरु जी दी फतेह... जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल. यही कुछ नारे हैं जो आजकल हर गुरुद्वारे में गूंज रहे हैं. हर गुरुद्वारे में गुरुनानक साहेब की जयंती के लिए खास तैयारी की जा रही है. वैसे तो हर गुरुद्वारा अपने आप में खास है लेकिन आज हम आपको उस गुरुद्वारे के बारे में बताएंगे जिसकी स्थापना खुद गुरुनानक साहेब ने की थी. जब 1505 में गुरुनानक जी पहली बार दिल्ली आए थे तब उन्होंने इस गुरुद्वारे की स्थापना की थी, इसीलिए ये गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए खासा महत्व रखता है. हरविंदर सिंह चेयरमेन, नानक प्याऊ गुरुद्वारा, का कहना है कि ये बहुत प्राचीन गुरुद्वारा है और दिल्ली ….

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इसलिए अनोखी है उत्तराखंड के कुमाऊं की होली!

इसलिए अनोखी है उत्तराखंड के कुमाऊं की होली!

होली भारत का एक प्रमुख त्योहार माना जाता है. ये त्योहार देशभर में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. मथुरा और वृंदावन की तरह ही उत्तराखंड के कुमाऊं में भी होली का त्योहार बेहद खास ढंग से मनाया जाता है.
 
बैठकी होली- बसंत पंचमी के दिन से ही कुमाऊं में होली का रंग चढ़ने लगता है. इस दिन से यहां जगह-जगह पर संगीत सभा बैठती है. शास्त्रीय संगीत पर आधारित रागों पर गीत गाकर जश्न मनाया जाता है. ये गीत कुमाऊंनी लोकसंगीत से प्रभावित होते हैं.
 
खड़ी होली- बैठकी होली के कुछ समय बाद खड़ी होली की शुर ….

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छत्तीसगढ़ के इस गांव में 150 सालों से नहीं मनी होली, ये है वजह

छत्तीसगढ़ के इस गांव में 150 सालों से नहीं मनी होली, ये है वजह

देशभर में हर साल फाल्गुन के महीने में होली का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. इस साल 2 तारीख को होली का त्योहार मनाया जाएगा. होली के दिन हर जगह मस्ती का माहौल रहता है पर बता दें कि एक जगह ऐसी भी है जहां पिछले 150 सालों से होली नहीं मनाई गई.
 
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से 35 किलोमीटर की दूरी पर खरहरी नाम का एक गांव है. कहा जाता है कि इस गांव में पिछले 150 सालों से होली का त्योहार नहीं मनाया गया है. गांव के बुजुर्गों का मानना है कि उनके जन्म के काफी समय पहले से ही इस गांव में होली ना मनाने का रिवाज है. इस गांव में करीब 4000 लोग रहते हैं.
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खेलैं मसाने में होली... जहां चिता की भस्म से खेली जाती है होली!

खेलैं मसाने में होली... जहां चिता की भस्म से खेली जाती है होली!

होली रंग-राग, आनंद-उमंग और प्रेम-हर्षोल्लास का उत्सव है. देश के अलग-अलग हिस्सों में होली अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है लेकिन मोक्ष की नगरी काशी की होली अन्य जगहों से अलग बिलकुल अद्भुत, अकल्पनीय व बेमिसाल है. आपने रंगों से होली तो खूब खेली होगी, लेकिन महादेव की नगरी काशी की बात ही निराली है. वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर शिव भक्त महाश्मशान में जलने वाले इंसानों के राख से तैयार भस्म से होली खेलते हैं.
 
दरअसल, फाल्गुन की एकादशी को यहां बाबा विश्वनाथ की पालकी निकलती है और लोग उनके साथ रंगों का त्योहर मनाते हैं. ऐसी मान्यता है कि बाबा उस दिन पार्वती का गौ ….

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वह मंदिर जहां हुआ था शिव-पार्वती का विवाह

वह मंदिर जहां हुआ था शिव-पार्वती का विवाह

रुद्रप्रयाग में स्थित 'त्रियुगी नारायण' एक पवित्र जगह है, माना जाता है कि सतयुग में जब भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था तब यह ‘हिमवत’ की राजधानी था. इस जगह पर आज भी हर साल देश भर से लोग संतान प्राप्ति के लिए इकट्ठा होते हैं और हर साल सितंबर महीने में बावन द्वादशी के दिन यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है.
 
आज भी प्रज्वलित है विवाह मंडप की अग्नि
मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए त्रियुगीनारायण मंदिर से आगे गौरी कुंड कहे जाने वाले स्थान माता पार्वती ने तपस्या की थी जिसके बाद भग ….

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बोध गया बिहार

बोध गया बिहार

बोध गया बिहार में स्थित एक बौद्ध धार्मिक स्थल है। बिहार बौधगया के आध्यात्मिक महत्त्व के कारण विश्व विख्यात है। इस स्थान को बौद्ध धर्म का तीर्थ स्थान कहा जाता है। यूनेस्को द्वारा इस शहर को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है। यहां स्थित महाबोधि मंदिर को बेहद विशेष माना जाता है।
 
बोध गया का इतिहास 
मान्यतानुसार गौतम बुद्ध ने फाल्गू नदी के किनारे बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था। तीन दिन तक लगातार तपस्या के बाद बैसाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस स्थान को बौद्ध सभ्यता का केन्द्र बिन्दू म ….

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इस गुफा में होंगे भगवान गणेश के कटे सिर के दर्शन

इस गुफा में होंगे भगवान गणेश के कटे सिर के दर्शन

भगवान गणेश के भक्तों के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा आस्था का अद्भुत केंद्र है. यह गुफा पहाड़ी के करीब 90 फीट अंदर है. यह उत्तराखंड के कुमाऊं में अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी. की दूरी तय करके पहाड़ी के बीच बसे गंगोलीहाट कस्बे में है. पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है. 
 
यहां है गणेश जी का कटा मस्तक:
हिंदू धर्म में भगवान गणेशजी को प्रथम पूज्य माना गया है. गणेशजी के जन्म के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोधवश गणेशजी का सिर धड़ स ….

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उत्तरकाशी में हैं दुर्योधन और कर्ण के मंदिर, यहां होती है इनकी पूजा...

उत्तरकाशी में हैं दुर्योधन और कर्ण के मंदिर, यहां होती है इनकी पूजा...

उत्तराखंड को देवभूमि भी कहा जाता है. यहां हर गली-कूचे में मंदिरों की भरमार है. हिन्दू धर्म के अनुसार 33 करोड़ देवी-देवता हैं, लेकिन उत्तराखंड में यह संख्या इससे भी कहीं ज्यादा हो जाती है, क्योंकि यहां भूमियां देवता से लेकर ग्वेल देवता, ग्राम देवता और कुल देवताओं की भी मान्यता है. ये वो जमीन है, जहां महाभारत के 'खलनायक' दुर्योधन और दानवीर कर्ण को भी पूजा जाता है.
जी हां, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में दुर्योधन और कर्ण के मंदिर हैं. दुर्योधन का मंदिर यहां के नेतवार नामक जगह से करीब 12 किमी दूर ‘हर की दून’ रोड पर स्थ‍ित सौर गांव में है. देहरादून से ….

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मक्का-मदीना (हज)

मक्का-मदीना (हज)

मक्का मदीना सऊदी अरब के हेजाज़ प्रांत में स्थित एक प्रमुख मुस्लिम तीर्थ स्थल है। इस्लामी परंपरा के अनुसार पैगम्बर मोहम्मद ने यहां इस्लाम की घोषणा की थी। मक्का मदीना मुस्लिम समुदाय के लिए एक पवित्र स्थान है। मक्का मदीना से संबंधित कई मान्यताएं लोगों के बीच प्रचलित है।
 
मक्का मदीना से इतिहास
माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां पैगम्बर साहब का जन्म हुआ था। पैगम्बर साहब ने ही मूर्ति पूजा का खंडन करते हुए यहां इस्लाम धर्म की स्थापना की थी। इसके बाद से यह स्थान इस्लाम धर्म के लोगों के लिए जन्नत तक पहुंचने का रास्ता तथा एक ….

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स्वर्ण मन्दिर

स्वर्ण मन्दिर

स्वर्ण मंदिर सिखों का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। जिस तरह हिंदुओं के लिए अमरनाथ जी और मुस्लिमों के लिए काबा पवित्र है उसी तरह सिखों के लिए स्वर्ण मंदिर महत्त्व रखता है। सिक्खों के लिए स्वर्ण मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसे "अथ सत तीरथ" के नाम से भी जाना जाता है। सिखों के पांचवें गुरु अर्जुनदेव जी ने स्वर्ण मंदिर (श्री हरिमंदिर साहिब) का निर्माण कार्य पंजाब के अमृतसर में शुरू कराया था। 
 
स्वर्ण मंदिर का इतिहास 
कहा जाता है कि हरिमंदिर साहिब का सपना तीसरे सिख गुरु अमर दास जी का था। लेकिन इसका मुख ….

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सिद्धिविनायक मंदिर

सिद्धिविनायक मंदिर

सिद्धि विनायक मंदिर महाराष्ट्र के सिद्धटेक नामक गाँव में स्थित है। यहां स्थित गणेश भगवान का मंदिर 'अष्टविनायक' पीठों में से एक है, जिसे 'सिद्धिविनायक' के नाम से जाना जाता है। इसकी उत्पत्ति के संबंध में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
 
सिद्दि विनायक मंदिर का इतिहास
मान्यता है कि यह मंदिर मूलत: 1801 में बना था। उस समय यह मंदिर बेहद छोटा था। 1911 में सरकार की सहायता से इस मंदिर का पुनर्निमाण किया गया। यहां स्थित भगवान गणेश की मूर्ति चतुर्भुजी है। मान्यता है कि यह मूर्ति एक ही पत्थर को काट कर बनाई गई है। . Read More