स्कूली शिक्षकों के दो पहलू

स्कूली शिक्षकों के दो पहलू

स्कूली शिक्षकों के दो पहलू

शिक्षक यह शब्द सुनते ही हमारे मनमस्तिष्क में एक सम्मानजनक छवि अंकित हो जाती है किन्तु यह बात स्पष्ट करूँ की शिक्षक और गुरु दौनो में भेद होता है, जहाँ शिक्षा प्रदान करने वाले व्यक्ति को शिक्षक कहा जाता है वहीं गुरु एक सटीक मार्ग पर पथप्रदर्शित कर उस मार्ग के माध्यम से लक्ष्य तक पहुँचाने का जरिया होता है, जो निरंतर भौतिक या भावात्मक रूप से अर्थात अपने विचारों से सदैव सही मार्ग के चयन में सहायता करते है. यह हम और आप सभी ने देखा होगा की वर्तमान छात्र उत्तीर् ….

Read More

मेरा देश बदल रहा है...

 मेरा देश बदल रहा है...

मेरा देश बदल रहा है...

देश के जो वर्तमान हालात है उसको देख कर कहीं न कहीं कहना लाज़मी है कि मेरा देश बदल रहा है, जी हाँ जिस देश के विषय में अंतराष्ट्रीय दार्शनिक केवल यह वि ….

Read More

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट

जय श्री राम, जो लेख पढ़ रहे है वो भी बोलें जय श्री राम, जोर से बोले जय श्री राम आज कल देश में यही चल रहा है संसद से लेकर बंगाल तक और बंगाल से लेकर जापान तक जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम इतना जयकारा सुनकर ऊपर भगवान श्री राम खुश हो कर सोच रहे होंगे की इतना जय श्री राम तो जब मैं लंका जीत कर अयोध्या आया था तब भी नहीं बोला गया था...

आगे काल्पनिक पटल पर आगे बढ़ें तो सोचते हैं कि यदि भगवान् राम का खुश होकर मन पुन: अवतार लेने का हुआ तो वो ….

Read More

हम कब सुधरेंगे...

 हम कब सुधरेंगे...

हम कब सुधरेंगे...

हमारा मुल्क भारत क्षमा चाहता हूँ हमारा देश भारत क्योंकि मुल्क शब्द का उल्लेख करते ही ध्यान एवं सम्बन्ध किसी विशेष वर्ग की ओर ही आकर्षित होता है और हम ….

Read More

शराब मुक्त या शराब युक्त भारत...

शराब मुक्त या शराब युक्त भारत...

शराब मुक्त या शराब युक्त भारत...

देश की वर्तमान समय में सबसे बड़ी समस्या शराब की है, जिसमें आज का युवा वर्ग लिप्त होकर अपने पथ से भ्रमित होकर कहीं न कहीं देश को ही आहत कर रहा है, देश के गुजरात और बिहार राज्य में शराब बंद है और गुजरात के लिए तर्क द ….

Read More

'चक्रव्यूह' में फंसा भारतीय किसान

'चक्रव्यूह' में फंसा भारतीय किसान

'चक्रव्यूह' में फंसा भारतीय किसान 

देश के किसी ना किसी हिस्से में किसानो को आये दिन सड़कों पर आंदोलन करने के लिए उतरना पड रहा है, देश के ग्रामीण क्षेत्रों की लगभग 58% आबादी खेती पर निर्भर है. इतने बड़े तबके की अशांति देश के लिए अच्छा संकेत नहीं है. देश में लगातार हो रहे ये आंदोलन एक गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं...

पिछले कई साल से ग्रामीण क्षेत्रों में खेती की मौजूदा स्थिति को लेकर एक आक्रोश पनप रहा है. अगर समय रहते समझकर इसका समाधान न किया गया तो पूरा देश एक भयंकर आंदोल ….

Read More

जातिवाद का घाव आरक्षण से बना नासूर

जातिवाद का घाव आरक्षण से बना नासूर

जातिवाद का घाव आरक्षण से बना नासूर

विगत दिवसों में लोक सभा चुनाव संपन्न हुए हैं, जिसमें पूर्णत: स्पष्ट देखा गया कि जाति के आधार पर राजनैतिक पार्टियों द्वारा टिकट का आवंटन किया गया है, साथ ही साथ राजनैतिक र ….

Read More

विकास एवं डिजिटलीकरण में तब्दील होती प्राकृतिक जबावदेही

विकास एवं डिजिटलीकरण में तब्दील होती प्राकृतिक जबावदेही

वर्तमान समय आग उगलती भीषण गर्मी का है और मानसून अपनी दस्तक देने के लिए तैयार हो चला है किन्तु विगत समय पर ध्यान दें तो पाएंगे की तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 47 डिग्री सेल्सियस तक का आंकड़ा छू आया है, वहीं सागर शहर के वृन्दावन वार्ड में दर्ज आंकड़ा 52 डिग्री सेल्सियस अंकित किया गया यानि की शासकीय आंकड़े के अनुसार सागर की जान कहे जाने वाले लाखा बंजारा झील के समीपवर्ती वार्ड के हालात यह रहे जो कि सोचनीय है...                        

Read More

तीख़ी बात

तीख़ी बात

पत्रकारिता विषय में स्नातकोत्तर पूर्ण करने के उपरांत मैं अभिनव मुखुटी राजा “तीख़ी बात“ नामक लेख के माध्यम से देश में हो रही उथल-पुथल तथा बदलाव के विषयों पर अपने विचार प्रकट करूँगा, इसी के साथ स्पष्ट करना चाहूँगा कि उक्त विचार पूर्णत: मेरे द्वारा लिखित एवं स्वयं के विचार होंगे जिसके बावत मेरी संस्था नो फ़िकर एवं वेबसाइट www.noficker.com कतिपय ही ज़िम्मेदार नहीं होंगे.

तीख़ी बात के माध्यम से देश के उक्त नागरिकों के विषय की बात उजागर करने का प्रयास करूँगा जिनका उपयोग केवल मतदान हेतु करके 5 वर्षों तक आशापूर्ण जीवन व्यतीत करने हेतु छोड़ दिया जाता है. वर्तमा ….

Read More