श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि मिलते हैं छह लाभ

 श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि  मिलते हैं छह लाभ

हिंदू धर्म की मान्याताओं के अनुसार यमराज जी का कहना है कि श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि छह लाभ मिलते हैं.
 
मनुष्यों का जैसे आहार अन्न है, पशुओं का आहार तृण है, वैसे ही पितरों का आहार अन्न का सारतत्व (गंध और रस) है. अत: वे अन्न व जल का सारतत्व ही ग्रहण करते हैं. शेष जो स्थूल वस्तु है, वह यहीं रह जाती है. हिंदू धर्म की मान्याताओं के अनुसार यमराज जी का कहना है कि श्राद्ध करने से इंसान को एक नहीं बल्कि छह लाभ मिलते हैं.
 
श्राद्ध करने से मिलने वाले लाभ
 
  1. ….

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कब से शुरू होगी नवरात्रि ? जानिए कैसे करें उपासना

 कब से शुरू होगी  नवरात्रि ? जानिए कैसे करें उपासना

शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया गया है. देवी के इन स्वरूपों की पूजा नवरात्रि में विशेष रूप से की जाती है. नवरात्रि के नौ दिन लगातार माता का पूजन चलता है.
 
हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार शारदीय नवरात्रि 29 सितंबर से शुरु होकर 7 अक्टूबर तक चलेगी. इस बार पूरे नौ दिन मां की उपासना की जाएगी. वहीं 8 अक्टूबर को धूमधाम के साथ विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा. इसके अलावा 8 अक्टूबर को ही दुर्गा विसर्जन भी किया जाएगा.
 
शास्त्रों में मां दुर्गा के नौ रूपों का बखान किया ….

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इस गुफा में होंगे भगवान गणेश के कटे सिर के दर्शन

इस गुफा में होंगे भगवान गणेश के कटे सिर के दर्शन

भगवान गणेश के भक्तों के लिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा आस्था का अद्भुत केंद्र है. यह गुफा पहाड़ी के करीब 90 फीट अंदर है. यह उत्तराखंड के कुमाऊं में अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी. की दूरी तय करके पहाड़ी के बीच बसे गंगोलीहाट कस्बे में है.

यहां है गणेश जी का कटा मस्तक:  हिंदू धर्म में भगवान गणेशजी को प्रथम पूज्य माना गया है. गणेशजी के जन्म के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोधवश गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया था, बाद में माता पार ….

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कौन है श्री गणेश का वाहन मूषक

कौन है श्री गणेश का वाहन मूषक

भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के मुकाबले उनका वाहन छोटा सा चूहा है। गणेश जी ने आखिर छोटे से जीव को ही अपना वाहन क्यों चुना? गणेश जी बुद्धि और विद्या के अधिष्ठाता देवता हैं। तर्क-वितर्क में उनका सानी कोई नहीं। एक-एक बात या समस्या की तह में जाना,उसकी मीमांसा करना और उसके निष्कर्ष तक पहुंचना उनका शौक है। मूषक भी तर्क-वितर्क में पीछे नहीं हैं। हर वस्तु को काट-छांट कर रख देता है और उतना ही फुर्तीला भी है।

गणेश जी ने कदाचित चूहे के इन्हीं गुणों को देखते हुए उसे अपना वाहन चुना होगा। राजा इन्द्र के दरबार में क्रौंच नामक गंधर्व था। एक बार इंद्र किसी गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे ले ….

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भगवान श्री गणेश के पुत्रों के नाम जानकर चौंक जाएंगे आप

भगवान श्री गणेश के पुत्रों के नाम जानकर चौंक जाएंगे आप

भारतीय धर्म और संस्कृति में भगवान गणेशजी सर्वप्रथम पूजनीय और प्रार्थनीय हैं। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य शुरू नहीं होता। पूजा में गणेश जी का किसी न किसी रूप में आह्वान किया ही जाता है।

शिवपुत्र गणेशजी को देवगणों का अधिपति नियुक्त किया गया है। गणेशजी की बहन का नाम अशोक सुंदरी हैं और उनके भाई का नाम कार्तिकेय है। दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ ऋग्वेद में भी भगवान गणेशजी का जिक्र है। ऋग्वेद में 'गणपति' शब्द आया है। यजुर्वेद में भी गजानन का उल्लेख है।

विघ्ननाशक की ऋद्धि और ….

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गणेश जी को क्यों चढ़ाया जाता है मोदक

गणेश जी को क्यों चढ़ाया जाता है मोदक

गणपति को विघ्नहर्ता कहा जाता है. इन 10 दिनों के दौरान जो व्यक्ति भगवान विनायक को प्रसन्न करने में सफल हो जाता है, उसके जीवन से हर विघ्न दूर हो जाता है और उस व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है. ऐसा कहा जाता है कि गणपति को यदि खुश करना है तो उन्हें मोदक का प्रसाद जरूर चढ़ाना चाहिए.

क्यों चढ़ाया जाता है मोदक:

गणेश जी की मोदक और लड्डू की पसंद के पीछे एक कहानी है. एक बार की बात है जब भगवान गणेश जी भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी से युद्ध कर रहे थे. ल ….

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मां लक्ष्मी से यह रिश्ता है श्री गणेश का

मां लक्ष्मी से यह रिश्ता है श्री गणेश का

विघ्नहर्ता भगवान गणेश शंकर-पार्वती के पुत्र हैं यह बात तो सर्वविदित है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश माता लक्ष्मी के 'दत्तक-पुत्र' भी हैं! पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार लक्ष्मी जी को स्वयं पर अभिमान हो गया कि सारा जगत उनकी पूजा करता है और उन्हें पाने के लिए लालायित रहता है।

उनकी इस भावना को भगवान विष्णुजी समझ गए। भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी का अहंकार ध्वस्त करने के उद्देश्य से उनसे कहा कि 'देवी भले ही सारा संसार आपकी पूजा करता है और आपको पाने के लिए व्याकुल रहता है किन्तु आपमें एक बहुत बड़ी कमी है ….

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अदासा गणपति के दर्शन से धन्यर हो जाएगा जीवन

अदासा गणपति के दर्शन से धन्यर हो जाएगा जीवन

विघ्‍नहर्ता भगवान श्री गणेश का एक ऐसा धाम भी है, जहां बाप्‍पा अपने भक्‍तों को विराट रूप में दर्शन देते हैं. इतना ही नहीं अपनी विशालकाय प्रतिमा की तरह ही गणपति अपने भक्तों के बड़े से बड़े दुख को भी हर लेते हैं और खुशियों का वरदान दे देते हैं. नागपुर के अदासा गणपति के दर्शन कर भक्‍तों का जीवन धन्‍य हो जाता है.

आस्था का ये वो सफर है जिसमें चढ़ाव ज्यादा है लेकिन, मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते थकान गायब हो जाती है. यहां पहुंचकर शरीर ही नहीं मन भी शांत हो जाता है. प्रकृति के आंचल में हरियाली के बीच पहाड़ों पर ….

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सिद्धिविनायक के चरणों में शीश नवाएं, मनचाहा फल मिलेगा

सिद्धिविनायक के चरणों में शीश नवाएं, मनचाहा फल मिलेगा

जिस दरबार में हर मनोकामना पूरी होती है. जिस दरबार में शीश नवाने भर से सिद्धि और समृद्धि मिलती है. वो दरबार है प्रथम पूज्य सर्वसिद्धि दायक भगवान श्री गणेश का जो विराजमान हैं सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में.

मुंबई के प्रभादेवी क्षेत्र में कदम रखते ही दूर से ही सिद्धिविनायक मंदिर का कलश नजर आने लगता है और उसके साथ दिखाई देने लगता है वो पवित्र ध्वज जो किसी प्रहरी की तरह अपनी ओर आने वाले हर श्रद्धालु की अगवानी करता है. ये ध्वज मानो बखान कर रहा हो उस परम शक्ति का जिसकी आराधना के बिना किसी भी शुभ काम का आरंभ नहीं होता.

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जहां एक छत के नीचे विराजते हैं गणपति के तीन रूप

जहां एक छत के नीचे विराजते हैं गणपति के तीन रूप

आप गणपतिजी के दर्शन करनें मंदिरों में तो गए ही होंगे लेकिन अगर ऐसा कोई मंदिर मिल जाए जहां एक साथ गणपति के तीन रूपों के दर्शन हो जाए तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है. जी हां गणपति के ये तीन रूप एक साथ विराजते हैं एक छत के नीचे और एक बार भी अगर भक्तों को इनके दर्शन का सौभाग्य मिल गया तो भक्तों की समस्त इच्छाएं पूरी होने की गारंटी है.

उज्जैन से करीब 5 किमी दूर बसा है भगवान चिंतामन गणेश का धाम जहां एक छत के नीचे भक्तों को एक नहीं बल्कि तीन-तीन गणपति के एक साथ दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है. एक तरफ जहां दिखते हैं च ….

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जब लद्दाख और कश्मीर स्वर्ग जैसा, तो हम क्यों कही घूमने जाएं ?

जब लद्दाख और कश्मीर स्वर्ग जैसा, तो हम क्यों कही घूमने जाएं ?

धारा 370 हटने के बाद से ही कश्मीर लगातार सुर्खियों में बना हुआ है. कश्मीर का जिक्र होते ही हर किसी के मन में वहां कि खूबसूरत वादियों की ख्याल आता है. यहां मनमोहक नजारों से लेकर, खाने-पीने की चीजों और तरह- तरह की राइड्स पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में और भी बहुत कुछ है जिसके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे.
 
शिकारा राइड
कश्मीर की खूबसूरत झीलों में शिकारे पर सवारी की जाती है. मुख्य रुप से ये राइड डल और नागिन झील में की जाती है. शिकारा मतलब लकड़ी की नाव. शिकारा सवारी के दौ ….

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यहां भक्तों के पाप हर लेते हैं विघ्न,हर्ता गणेश

यहां भक्तों  के पाप हर लेते हैं विघ्न,हर्ता गणेश

आंध्र प्रदेश के चित्तूर में विघ्‍नहर्ता गणपति का एक ऐसा धाम है जहां वे अपने भक्‍तों के सारे पाप हर लेते हैं. विनायक का ये विशाल मंदिर नदी के बीचों बीच बसा है. यहां विघ्नहर्ता, सुखकर्ता न सिर्फ भक्तों के पाप हर लेते हैं बल्कि भगवान के सामने शपथ खाकर गलतियां सुधारने की फरियाद लगाने वाले की हर गुहार भी सुन लेते हैं.

आस्था और चमत्कार की ढेरों कहानियां खुद में समेटे कनिपक्कम विनायक का ये मंदिर आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में मौजूद है. इसकी स्थापना 11वीं सदी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम ने की थी. बाद में इसका विस् ….

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भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाते तुलसी ?

भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाते तुलसी ?

धर्म ग्रंथो के अनुसार जो तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इतनी प्रिय की भगवान विष्णु के ही एक रूप शालिग्राम का विवाह तक तुलसी से होता है वही तुलसी भगवान गणेश को अप्रिय है, इतनी अप्रिय की भगवान गणेश के पूजन में इसका प्रयोग वर्जित है।  

एक बार श्री गणेश गंगा किनारे तप कर रहे थे। इसी कालावधि में धर्मात्मज की नवयौवना कन्या तुलसी ने विवाह की इच्छा लेकर तीर्थ यात्रा पर प्रस्थान किया। देवी तुलसी सभी तीर्थस्थलों का भ्रमण करते हुए गंगा के तट पर पंहुची। गंगा तट पर देवी तुलसी ने युवा तरुण गणेश जी को देखा जो त ….

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इस मंदिर में विराजमान हैं गोबर के गणेश!

इस मंदिर में विराजमान हैं गोबर के गणेश!

बाप्पा के आपने कई रुप देखे होंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के महेश्वर में गजानन की गोबर की मूर्ति है. ये मूर्ति हजारों साल पुरानी है, कहते हैं यहां नारियल चढ़ाकर पा सकते है बाप्पा से मनचाहा वरदान.
 
माथे पर मुकुट, गले में हार, और खूबूसरत श्रृंगार बाप्पा के इस मनमोहक रूप में छिपा है भक्तों के हर दुख दर्द का इलाज. गणपति का ये रुप मन मोह लेता है और हैरान भी करता है क्योंकि यहां गणपति को गोबर गणेश के नाम से पुकारते हैं भक्त. मध्य प्रदेश के नीमाड़ क्षेत्र में माहेश्वर कस्बे में ….

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गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा यानि दूब यह एक तरह की घास होती है जो गणेश पूजन में प्रयोग होती है। एक मात्र गणेश ही ऐसे देव है जिनको यह चढ़ाई जाती है। दूर्वा गणेशजी को अतिशय प्रिय है। इक्कीस दूर्वा को इक्कठी कर एक गांठ बनाई जाती है तथा कुल 21 गांठ गणेशजी को मस्तक पर चढ़ाई जाती है।

पौराणिक कथा :

कथा के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था। इस दैत्य के कोप से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी। अनलासुर ऋषि-मुनियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से त्रस्त होकर देवराज इंद्र सहित सभी देवी-देवता और प्रमुख ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने ….

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हिंदू धर्म में क्या है मूर्ति पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में क्या है मूर्ति पूजा का महत्व

हिन्दू धर्म में पूजा उपासना की तमाम पद्धतियां प्रचलित हैं. इसमें साकार की उपासना भी की जाती हैं और निराकार की भी, साकार ईश्वर की उपासना में मूर्ति पूजा का विशेष महत्व है. बिना मूर्ति या प्रतीक के साकार ब्रह्म की उपासना नहीं हो सकती.
 
हिन्दू धर्म में कबसे यह प्रचलन में है-
वैदिक काल और बाद में मूर्ति पूजा का कोई साक्ष्य नहीं मिलता. हालांकि महाभारत में इंद्र का उल्लेख जरूर आता है, सबसे पहले हड़प्पा की खुदाई ….

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गणेश जी को बतानी है मन की बात तो चिट्ठी इसे पते पर भेजो...

गणेश जी को बतानी है मन की बात तो चिट्ठी इसे पते पर भेजो...

इस देश में जगह-जगह आस्था और विश्वास के अद्भुत उदहारण देखने को मिलते हैं. आज के जमाने में जहां इंटरनेट, ई-मेल और फोन का चलन है. वहां एक ऐसी भी जगह जहां लाखों की तादात में चिट्ठियां भेजी जाती हैं. यह चिट्ठि‍यां किसी इंसान को नहीं बल्कि गणनायक भगवान गणेश को भेजी जाती हैं.
 
जी हां, राजस्थान के रणथंभौर में एक मंदिर ऐसा है जहां गणपति को हर शुभ काम से पहले चिट्ठी भेजकर निमंत्रण दिया जाता है. इसलिए यहां हमेशा भगवान के चरणों में चिठ्ठियों और निमंत्रण पत्रों का ढेर लगा ….

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किस रंग की गणेश मूर्ति होती है शुभ? जानें स्थापना का सही तरीका

किस रंग की गणेश मूर्ति होती है शुभ? जानें स्थापना का सही तरीका

गणेश चतुर्थी यानी गणपति का सबसे बड़ा उत्सव आ चुका है. इस साल गणेशोत्सव 2 सितंबर से 12 सितंबर तक मनाया जाएगा. गणेश पूजन से पहले श्रद्धालु घर में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं. लेकिन गणेश मूर्ति को घर में लाने से पहले कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है. आइए आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं.
 
गणेश की अलग-अलग मूर्तियों का महत्व
गणेशजी की अलग अलग मूर्तियां अलग अलग-तरह के परिणाम देती हैं. सबसे ज्यादा पीले रंग की और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना शुभ होती है. नीले रंग के गणेश जी को "उच्छिष्ट गण ….

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भारत-पाकिस्‍तान की सीमा पर मौजूद इस गुरुद्वारे में हजारों लोग टेकते हैं माथा

भारत-पाकिस्‍तान की सीमा पर मौजूद इस गुरुद्वारे में हजारों लोग टेकते हैं माथा

 

सिखों का पवित्र स्‍थल गुरुद्वारा करतार साहिब भारत-पाकिस्‍तान बॉर्डर पर मौजूद है. माना जाता है कि सिख धर्म के पहले गुरु गुरु नानक यहां 17 साल त ….

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दुनिया को गीता का उपदेश देने वाले श्री कृष्ण को आखिर क्यों कहा जाता है रणछोड़

दुनिया को गीता का उपदेश देने वाले श्री कृष्ण को आखिर क्यों कहा जाता है रणछोड़

 

इस साल देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 23 और 24 अगस्त को मनाया जा रहा है. इस मौके पर कान्हा के भक्त उन्हें प्रसन्न करने का कोई मौका नहीं छोड़ना ….

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